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माँ दुर्गा

विशद भाल पर सृष्टि-पटल, भृकुटि पर मर्यादा की गति-मति, नयनों में सजग, समग्र दृष्टि, अधरों में अनंत जीवन-रेख धरे,  माँ, तेरे आनन धवल, पुनीत, सकल छविधाम!                हे सभ्यतामानिनी, संस्कृतिरक्षिणी,        विघ्ननाशिनी,  शक्तिधारिणी,        माँ, तुझको है बार-बार  नमन!  तेरे आशीष से, माँ, जग का संताप दूर हो, चारों ओर तुमुल तम-तोमों,  कलुषों, अंहकारों का मर्दन हो,  ज्ञान-शक्ति बड़े उद्देश्यों से जुड़ कर  सुशक्ति-दीपित, सात्विक बने, विजय की शालीन शैली हर सफलता के लिए अभीष्ट बने!  सकर्मक शब्दों की महती छवि, जीवन, जीवन की सुंदर नियत,  सम्पूर्ण स्वत्व, अस्तित्व  तेरे चरणों पर समर्पित हों !  सब यामों के रग-रग में श्याम बसें, सब अभिरामों में राम रहें!                 हे भव-भाव-तारिणी, माँ भवानी,        तुझको है बार-बार नमन!  - सतीश  April 2, 2022 (चैत्र नवरात्रि)