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मुझे तुम्हारी यादों का

                                         मुझे तुम्हारी यादों का हर रूप सुहाना लगता है, जीवन के रंगों-रेशों का हर रूख रूहाना लगता है; गहरे राग-विरागों का यह मूल पुराना लगता है, जीवन के सुंदर सर्गों का यह मुख-मुहाना लगता है । मन यहाँ मिले, तन वहाँ मिले, कुछ ऐसा-ऐसा लगता है, मन यहाँ रमे, तन वहाँ रमे, कुछ यहाँ मिले, कुछ वहाँ मिले, कुछ ऐसा-ऐसा लगता है, मुझे तुम्हारी यादों का  हर रूप सुहाना लगता है। आँखों-ओठों का यह विस्मय कुछ सपना-सपना लगता है, कुंचित केशों का यह संचय कुछ अपना-अपना लगता है । विंध्य से चलती वातों-अलकों से हिमपति का उन्नत शीश मिले, मेघों की साँसों में बहके-बहते, हम साथ उठे गिरे, हम साथ गिरे, पूरब-पश्चिम-उत्तर-दक्षिण सब साथ मिले, सब साथ जुले, कुछ ऐसा-ऐसा लगता है, मुझे तुम्हारी यादों का  हर रूप सुहाना लगता है। सब मूलों में, सब फुनगी में, सब डालों में, सब शाख़ों में, सब शालों में, सब छालों में, सब पत्तों में, सब फूलों में, सब द्रुमों में, सब दामों में,  कलियों क...