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भ्रष्टाचार की डिग्री!

भ्रष्टाचार की डिग्री! सोचता हूँ, सोचता रहता हूँ कि भ्रष्टाचार की “डिग्री” क्या होगी?  उसकी रूप-छवि कैसी होगी?  उसकी आकृति, उसकी कृति क्या होगी?  वह उच्चतम संस्थानों में पढ़ी-लिखी होगी?  पूरी “शिक्षा-दीक्षा” के साथ तकनीकों से लैस होगी?  वह कभी स्वघोषित “लोकपाल”,  कभी स्वयं भ्रष्टाचार हो जाती होगी?  वह कभी पत्र-पत्रिकाओं में  बड़े-बड़े दावों के साथ छपती होगी?  कभी उन्हें ख़रीदती होगी, कभी स्वयं बिकती होगी? वह चारा के “क्रांतिकारी” नायकों के साथ  “सुशासन” और “विकास” की परियों की  “सम्पूर्ण क्रांति” की परिकथाओं में मग्न हो आमोदपू्र्ण  गलबाँहियाँ  करती होगी?  क्या  वह प्रजातंत्र के पुनीततम परिसर में आतंको के नृशंस अनाचारों के पक्ष में अश्लील रूप से ठहाके लगाती होगी? वह सेना से उसकी कारवाइयों के लिए प्रमाण-पत्र माँगती होगी ? सोचता हूँ, सोचता रहता हूँ कि भ्रष्टाचार की “डिग्री” क्या होगी?  उसकी रूप-छवि कैसी होगी?  उसकी आकृति, उसकी कृति क्या होगी?  ⁃ सतीश  April 29, 2023.