हर चोट की ओट में
हर चोट की ओट में
एक देवी बैठी होती है,
सृष्टि की शक्तियों को सँभालती-सहेजती;
हर घाव की पीड़ा में
सृजन की बेचैनी बोलती है,
हर दर्द की ऐंठन में
कृति-क्रिया की सुन्दर भंगिमाएँ बसी होती हैं।
हर अशुभ में
शुभ, शुभ्र संभावनाएँ समायी होती हैं,
हर ठेस-ठोकर में
ऊँची छलाँगों की ऊर्जा भरी होती है,
हर प्रहार में
प्रेरणाओं के चिन्ह पड़े होते हैं,
हर विघ्न में
सुगति-संवेग के स्वप्न-संगीत समाये होते हैं,
समय के कठिन-कठोर तेवरों में
प्रकृति के अदृश्य, अमोघ आशीष बसे होते हैं,
हर तम में
उजाले के कर्मपथ के मानचित्र धरे होते हैं।
- - सतीश
18Jan/19 Jan, 2021
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