ऐसा हमारा गणतंत्र बने
हमारी व्यवस्था के सब अंग-प्रत्यंग
सुचालित-जनसेवी-स्वतंत्र रहें,
प्रजातंत्र के यंत्र-तंत्र पर
जन-गण की जय हो,
प्रजातंत्र के मूल-मंत्र में
देश-हेतु ही चरम ध्येय हो,
विद्या-कला-गुण-धन, सब शक्तियाँ
देश-मन पर अर्पित हों,
ऐसा हमारा गणतंत्र बने।
हर शिक्षा से बड़ी देश-शिक्षा हो,
हर पूजा से बड़ी देश-पूजा हो,
हर कर्म से बड़ा देश-कर्म हो,
हर धर्म से बड़ा देश-धर्म हो,
हर यज्ञ से बड़ा देश-यज्ञ हो,
ऐसा हमारा गणतंत्र बने।
तर्क-वितर्क हो, नोंक-झोंक हो,
राजनीति के दाँव-पेंच हों,
पर, दल-समूह प्रजातंत्र की दलदल न हो,
संसद-सभा-संस्थानों की गरिमा बनी रहे,
ऐसा हमारा गणतंत्र बने।
सत्याग्रहों में सत्य का ईमानदार आग्रह हो,
हड़तालों में समस्याओं की सजग पड़ताल हो,
प्रदर्शनों में समाधान ढूँढने की सच्ची निष्ठा हो,
हमारे अधिकार व कर्तव्य-बोध साथ-साथ बसें,
ऐसा हमारा गणतंत्र बने।
चाहे पक्ष हो या हो विपक्ष,
विरोध केवल विरोध के लिए न हो;
बेहतर से बेहतर होने की सकारात्मक प्रतिस्पर्धा हो,
जन-जन की इकट्ठी प्रगति ही उद्देश्य रहे,
ऐसा हमारा गणतंत्र बने।
- सतीश
18 Jan/25 Jan, 2021.
बहुत सुन्दर 💙❤️🇮🇳
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