तब मैं किसान हूँ
जब मैं सरकार की नीतियों की
‘सकारात्मक’ आलोचना करता हूँ,
तब मैं किसान हूँ!
जब मैं केवल विरोध के लिए
विरोध नहीं करता,
तब मैं किसान हूँ !
जब मैं देश की सैनिक कारवाई के लिए
सेना से प्रमाण नहीं माँगता,
तब मैं किसान हूँ!
जब मैं लोगों को भरमाने के लिए
झूठ बोल-बोल कर,
कोर्ट में माफ़ी माँगने की
हरकतें नहीं करता,
तब मैं किसान हूँ!
जब मैं लोकसभा-राज्यसभा में
असम्मानीय व्यवहार कर,
‘राजघाट’ पर अनशन करने का
ढोंग नहीं करता,
तब मैं किसान हूँ!
जब मैं शाहिनबाग के प्रदर्शन-दर्शन को
देश के विरूद्ध साज़िश के लिए
इस्तेमाल नहीं करता,
तब मैं किसान हूँ!
जब मैं प्रजातंत्र की मान्यताओं की
बलि नहीं चढ़ाता,
तब मैं किसान हूँ!
जब मैं देश के मानचित्र, उसकी चौहद्दी
के सम्मान के लिए
‘सत् श्री अकाल’ बोलता हूँ,
तब मैं किसान हूँ!
जब मैं देश की एकता-अखंडता के लिए
क़ुरान की आयतें पढ़ता हूँ,
तब मैं किसान हूँ!
जब मैं देश-मर्यादा के लिए
‘राम-कृष्ण’ को याद करता हूँ,
तब मैं किसान हूँ!
- सतीश
20 Dec, 2020
उत्तम और मर्यादित कटाक्ष, समकालीन
जवाब देंहटाएंबहुत ख़ूब भइया
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