लोग कहते हैं

       

चाँद के शरीर पर जो जीवन-चिन्ह है,

कुछ लोग कहते हैं- 

वह दाग है।

सूरज में जो जीवन-प्राण-उष्मा-ऊर्जा है,

लोग कहते हैं-

वह आग है।


अपने विधान-पथ में

भरी दोपहरी में,

जब सूर्य कर्म-सन्नद्ध  होकर 

उज्ज्वलता बिखेरता है,

लोग कहते हैं,

वह तपतपा-तिलमिला-चिलमिला रहा है,

वह अनावश्यक रूप से कठोर है।


रात जब दुनिया को

ऊर्जापूर्ण विश्राम दे रही होती है,

लोग कहते हैं,

वह आभारहित होकर काली हो गई है,

वह अकारण भयकारी हो गई है।


यों, लोग कहते हैं,

लोग कहते रहते हैं ।


                                        - सतीश

                                        28-Dec-2020


                                                  

                                         

  






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