वीणा के तार

        

वीणा के तार चुपचाप पड़े होते हैं,

सुर  की संभावनाएँ लेकर;

वे मौन होकर अपने आप को 

साधते-बाँधते रहते हैं!

उनका स्वत्व उन्हें 

ऐंठता नहीं;

वे विविध योग्यताओं के साथ 

हँसते-खेलते रहते हैं,

उन्हें उकसा कर, 

उन्हें आलोड़ित कर।

वे तान नहीं बनते,

तानों में संचरित होते रहते हैं।

     

 - सतीश 

3 April, 2021

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