सन्नाटे की ध्वनि

रात के बीचों-बीच 

एक ध्वनि उठती है,

मन के भीतर;

वह शोर नहीं मचाती,

दूर से आती है,

बहुत दूर तक जाती है, 

जाना चाहती है;

मन को खंगालती रहती है,

आती-जाती, उठती-गिरती। 


ये सन्नाटे की ध्वनि! 


    - सतीश

 3 April, 2021. 


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