धर्म और अर्थ
धर्म अर्थ के पंखों में
सात्विक रंग घोलता है,
धर्म-चेतना अर्थ की धुरी को
शालीनता पहनाती है,
धर्म-सम्पदा अर्थ की उड़ानों को
सुप्रज्ञा देती है!
अर्थ के ऊँचे-विस्तृत आयाम
धर्म-स्तम्भों की रक्षा करते हैं,
उसके धारकों को
आत्म-विश्वास देते हैं,
उन्हें हेय समझे जाने से रोकते हैं,
“धर्म-परिवर्तन” को टोकते हैं,
“धर्म-परिमार्जन” को प्रेरित करते हैं।
जुते रहें
धर्म और अर्थ जीवन-रथ में;
सम्यक् विधान से वे
एक-दूसरे को
शक्ति-संबल, धवलता देते रहें।
धर्म अर्थ का सारथी बना रहे!
-सतीश
19 April, 2021.
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