अटके आँचल पर
कॉंटों में अटके आँचल पर
सुंदरता निश्चिंत झूम रही है,
मुस्काती-सी, शर्माती-सी,
कुछ खुलती-सी, कुछ ढँकती-सी।
अदृश्य बोध से बेसुध हुई अलकें
सुहाने आनन पर अनवरत
गिरती-फिसलती-पसरती,
हल्के-हल्के खुलते हुए ओठों की
सीधी-टेढ़ी, आनंद-भरी आकृतियाँ
स्मृतियों के तन पर सशरीर फैलतीं,
स्पष्ट भावनाओं से विभोर होकर
प्रेमिल पटों-पुटों को
उकसाती-उभारती-सी,
हवाओं की प्रसन्न हिलोरों पर
मन को बार-बार उमेठती,
इतराती, बहती, उमगती-उमगाती-सी ।
-सतीश
27 August, 2021.
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