हमारे सैनिक, हमारे शहीद
नदियों के बहते रहने में,
पर्वत के ऊपर उठने में,
सागर के थमने-थिरने में,
संकल्प तुम्हारा बसता है,
सौगंध तुम्हारी बसती है।
पूरे भारत का रोम-रोम
तुम पर अर्पित होता है।
उड़हुल के लाल तेवर में,
सरसों की पीली मस्ती में,
केसर के उज्ज्वल मानों में,
मन-मान तुम्हारा रहता है,
मूल्य-प्राण तुम्हारा रहता है।
पूरे भारत का रोम-रोम
तुम पर अर्पित होता है ।
पथ-पगों, पगडंडियों पर,
मेड़ों-मेरूदंडों पर,
खेतों में, खलिहानों में,
फसलों में, दानों में,
दान तुम्हारा रहता है,
अवदान तुम्हारा रहता है।
पूरे भारत का रोम-रोम
तुम पर अर्पित होता है ।
गीता के कर्म-श्लोकों में
तेरे जीवन की बाती है,
गाँधी के चरखे पर चढ़ा हुआ हर सूत
तेरे अर्पण की अर्जित थाती है।
पूरे भारत का रोम-रोम
तुम पर अर्पित होता है |
कृष्ण-वंशी के सृजन-सुर में
धुन तुम्हारी रहती है,
श्रीराम के मर्यादा-वाणों में
टंकार तुम्हारी रहती है,
शिव के मान-डमरू में
नाद तुम्हारा रहता है।
पूरे भारत का रोम-रोम
तुम पर अर्पित होता है।
-सतीश
June, 2020
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