पसीना और पर्व

          

पसीना में है सकर्मक सीना,

स्वेद में सम्पूर्ण वेद, 

है कर्म सबसे सुंदर मर्म,

जीवन का यही उच्चतम धर्म!


विराम नहीं, मंज़िल नहीं, लक्ष्य-विंदु नहीं,

यात्रा ही जीवन का सबसे बड़ा पर्व है।

और, उस यात्रा का आनंद सबसे पवित्र संहिता,

सबसे बड़ा श्रेय, सबसे बड़ी प्राप्ति है। 


-सतीश 

Sep 29, 2021. 




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