गिद्ध चारों ओर खड़े हैं!

गिद्ध चारों ओर खड़े हैं!

हम अपनी आलोचना करने की शक्ति रखते हैं,

अपनी कमियों को देखने की प्रवृत्ति रखते हैं;

पर, वे तो सदैव भोज-भात में लगे हैं,

छीना-झपटी, बंदर-बाँट में फँसे हैं,

सत्ता के कलुषित आहार-व्यापार में पड़े हैं! 


उनके दोषारोपण का ठौर नहीं, तुक नहीं,

उन्हें विरोध की मर्यादा का ज्ञान नहीं, 

विरोध के लिए विरोध करते रहना

उनकी अचूक मान्यता है,

यही उनकी नियत, यही नियति है! 


सतीश 

         Jan 8, 2022.

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