तम की छाती पर

हम एक हल्की  दीप-ज्वाला ही हो जाते,

अँधेरे से लड़ तो लेते  - 


उजला-पीला-लाल होकर,

कभी एक छोटी रेखा में उठकर,

कभी दृढ़ होकर, कभी हिलडुल कर,

कभी सीधे, कभी तिरछे होकर,

कभी शांत, निश्चिंत भाव की उष्णता लिए,

कभी तीक्ष्ण तेवर से लपलपाकर,

कभी झिलमिला कर ही सही, 

कभी तिलमिला कर ही सही,

तम की छाती पर तन तो जाते! 


⁃ सतीश 

Oct 5, 2021. 




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