धरती-बोध


ऊँचाइयाँ चाहे जितनी भी भली हों,

आँखों में धरती होनी चाहिए;

उड़ानें चाहे जितनी भी बड़ी हों,

उनके उद्देश्यों में धरा धरी होनी चाहिए!


सूरज हो, या चाँद

उनकी किरणों को 

अपने स्वत्व से अलग होकर 

दूर आना पड़ता है,

धरती तक पहुँचना पड़ता है,

तभी उनकी ताक लोगों को होती है,

तभी वे नमस्य होते हैं!


अन्यथा, बहुतेरे बड़े अस्तित्व 

आकाशगंगा में अदृश्य रह जाते हैं!

उनकी प्रतिभा वसुधा को छूती नहीं,

इसलिए, वे चाहे नहीं जाते,

खोजे नहीं चाहते,

आराध्य नहीं हो पाते! 


May 7, 2022.

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