व्यापक बीमारी

हर भटकी प्रवृत्ति, स्वार्थरंजित अभिव्यक्ति 

प्रजातंत्र में है एक मत, विचार और दृष्टि! 


सच और सही को नकारते रहना

यंत्र-तंत्र की निपुण, चतुर शैली,

प्रजातंत्र की आदत-सी हो गई है!


हम जो हैं, वैसा लगे नहीं?

वैसा दिखे नहीं? 


“स्व” को स्वीकार नहीं करना,

आत्म-हनन को विशेष बोध मानना

व्यक्ति से व्यवस्था तक

के रग-रग में धँसी 

एक भयानक त्रासदी है,

व्यापक बीमारी है!


सतीश 

May 14, 2022.

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