सच्चा स्वार्थ

पूछता रहता हूँ अपने आप से-

सच्चा स्वार्थ क्या है? 


आते-जाते दिन-रात, लाभ-हानि के

छोटे-बड़े अंकगणित में अंकित-टंकित रहना?

उनसे स्वयं को, दूसरों को 

रेखांकित करते रहना? 

तौल-तराज़ू को बनाते रहना?

उसपर चढ़ते-उतरने रहना? 


या, औरों के प्रति सकारात्मक,

गुणात्मक रूप से श्रेष्ठ होना? 

ताकि कभी “अचानक”, अनायास ,

अच्छे होने-दिखने की बेतुकी 

आवश्यकता नहीं हो? 

और, “स्व” को आँकना,

उसके सही अर्थों को पहचानना,

स्वत्व की सीमाओं को 

सतत् फैलाते रहना?

जीवन के बड़े उद्देश्यों से 

स्व को जोड़ देना,

जोड़ते रहना ? 


सच्चे “स्व” का सच्चा “अर्थ” क्या है? 


- सतीश 

May 15, 2022. 







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