लॉस वेगस की एक सुबह
रूखे-सूखे पर्वत के पीछे
धीरे-धीरे उठता हुआ, मग्न सूरज,
स्वर्ण-आभा से प्रसन्न क्षितिज,
लाल-लाल होती प्रकृति!
कभी मन्द, कभी तेज बहती हवा -
हँसती हुई, भोली, और थोड़ी ठंडी!
कभी चुपचाप बह जाती,
कभी सशब्द कुछ कहती!
हवा की साँसें आपस में एक-दूसरे को
उकसातीं, फिर, अविकारपूर्ण गति से
अपनी लय में लीन हो जातीं।
सीधी-सीधी आ रहीं हैं सूर्य की किरणें,
पर, इस वेला में,
अनावश्यक रूप से तीक्ष्ण होने से हिचक रही हैं।
अधिकांश शहर अब भी सोया है,
रात में व्यस्त, अति व्यस्त रहने वालीं
सड़कें शांतमना, खुली लेटीं हैं;
सूरज निरंतर ऊपर उठने की धुन में है,
सुबह सुबह होने में लगी है!
सतीश
3 July 2022/4th July 2022.
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