तो, सावन है!
अशेष, सुंदर शेष-अवशेष,
समन बरस जायें, तो, सावन है!
आत्मा के हर्ष चेतन विमर्श करें,
जग-आँसुओं की गाथा सुनें,
मन यों छहर जाये, तो, सावन है!
बादलों के बेचैन, सरस दलों में
माटी की हँसी, दृष्टि और द्वंद्व
बारी-बारी से कौंध जायें,
तुम यों भीग जाओ, तो, सावन है!
ऊँचे आसन का उज्ज्वल मान
जीवन के रोर-शोर से परे
पोर-पोर में धूलि की पीर लिये
जब झूम सके, तो, सावन है!
- सतीश
14 Jul, 2022.
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