गुरू
संभवत:,
सबसे बड़ा गुरू
हमारी चेतना है।
वह हमेशा हमें सचेत रखती है,
निश्चेत होने से बचाती है;
जगह-जगह, आवश्यकतावश,
हमें टोकती है;
वह “अहम्” को “हम” की ओर
ले जाती है,
धर्म को
शील-मर्यादा देकर
सच्चे रूपों में धार्मिक बनाती है,
विज्ञान को ज्ञान के
सकारात्मक आयामों से जोड़ती है;
जीवन-भावों को
नयी-नयी संधि, समास देकर
अर्थ-तत्वों से भर देती है,
हमारे जीवन को
सच्चा उपसर्ग, सार्थक प्रत्यय देती है,
देती रहती है।
- सतीश
5 September, 2021.
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