जय गणेश
गण को, गणों को,
गुण-गणों को नमन !
गणों के ईश को नमन!
सगुण-निर्गुण, आगम-निगम,
चर-अचर, जर-अजर को
भव-विभव के कल्याण-भावों से
सिक्त, सविनय, समन, हमारा नमन!
सहेतु या अहेतु, सहित या रहित भाव से
जग के सच्चे उद्देश्यों के प्रति
सजग, सात्विक होकर
छोटी से छोटी सवारी पर चढ़ कर
तुमने माता-पिता को मन में धारे,
उनकी धुरी के चारों ओर
जीवन का गहन अवगाहन किया,
आकलन, अवलोकन, आराधन किया।
यों, तुमने हमें स्पष्ट बताया -
जीवन के श्रेष्ठ आरोहण के
सुंदर, उच्च, शील और सत्व !
तेरे मुखमंडल पर विराज रहे
सृष्टि के दिव्य निरूपण, प्रक्षेपण,
जीवन के सरल-सीधे, वक्र चक्र !
ऐ आदि-अनन्त, तुझको नमन!
-सतीश
31 August/1st September, 2022
टिप्पणियाँ
एक टिप्पणी भेजें