नारी तुम

नारीतुम


तुम हो अमिटअडोल धुरी,

जीवन-योग की कथा मनोहर,

युग-युगों की अमूल्य थाती,

माँबेटीपत्नीबहनसखासहचर


तुम हो जीवन की पहली शिक्षिका

स्वयं सृजनसृजन-कर्म की प्रथम शिक्षा


तुम हो सृष्टि की संजीवनी प्रेरणा

व्यवस्थाओंसंस्थाओं की दृढ़मानक नींव

स्वप्नोंकल्पनाओंसंभावनाओं की अपरिमेय देह,

परम्परा और आधुनिकता की संयुक्त दिव्य दृष्टि,

जीवन-कर्मों की वृहत्गूढ़सुंदर आयाम-छवि


तुम हो प्रकृतिसचेतन शक्ति

कालसमय की छुअन से परे

चेतन संवेगों से सतत् गतिमान 

सभ्यता-संस्कृति की शील-कृति


-सतीश 

Jan 27, 2023. 







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