हिंदू धर्म


लोगों ने मुझको “जात” कहा,

लोगों ने मुझको घात कहा, 

लोगों ने मुझको वाद कहा,

लोगों ने मुझको विवाद कहा,

लोगों ने मुझको संकीर्ण कहा,

लोगों ने मुझको जीर्ण कहा!


पर, सदियों से सदियों तक,

युगों से युगांतर तक 

मानवता के ह्रदय में बैठ-पैठ कर

सुचेतना के स्वरों-सुरों-संगीतों को 

मैं निरंतर अथक ढूँढता आया;

जीवन के वृहत् अर्थों को थामता आया,

गूढ़ संदर्भों को निर्विकार साधता आया,

अनंत धाराओं  के सकल व्यक्तित्वों को

विविधता की पूरी समग्रता में समेटता आया! 


विश्व के कोने-कोने में जाकर 

नया क्षितिज अनवरत बनाता आया,

हर रात को नया प्रात देता आया! 


-सतीश 

April 10/11, 2023. 




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