कला और कलाकार
कला के दर्पण में पहली छाया
कलाकार की होती है,
कला-कृति की पहली ध्वनि
रचनाकार के मन और मानस की होती है,
कला की पहली संवेदना, उसकी प्रथम वेदना
रचयिता की होती है!
कला सबसे पहले कलाकार के
चेहरे और चरित्र से होकर गुजरती है,
उसकी मर्यादा-अमर्यादा, प्रतिष्ठा-अप्रतिष्ठा,
निष्ठा और नियत के साथ स्वयं को गढ़ती है!
चाहे-अनचाहे, जाने-अनजाने,
प्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष रूप से
परकीय अनुभव भी सबसे पहले
कलाकार के जीवन से होकर गुजरते हैं,
उसकी आत्मा में जलते हैं, उजलते हैं,
उसके अनुभवों में, भाव-भवों में तपते हैं,
उसके जीवन-सार, उसकी सरंचना के साथ पलते-बढ़ते हैं,
उसके तत्वों और तंतुओं से जड़े होते हैं -
आदि-अनादि रूपों में, अपरूपों में !
-सतीश
June 18, 2023.
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