नत -उन्नत
नत और उन्नत एक दूसरे के विपर्यय नहीं!
जब-जब
नत होकर अपने आप को देख सका,
नत होकर अपने व्यर्थों को समझ सका,
नत होकर स्व के अर्थों को माँज सका,
अपनी हठ की गाँठ को कुछ खोल सका,
उज्ज्वल राहों के रोधों को हटा सका,
तब-तब नत होना वृथा नहीं रहा, लगा कि
मन की ग्रीवा को सप्राण शक्ति मिल गई,
चेतना को उन्नत अर्थ-सत्ता मिल गई!
सचमुच,
नत और उन्नत एक दूसरे के विपर्यय नहीं!
-सतीश
August 27, 2023.
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