आतंकवाद की शैली
वे पहले आतंक फैलाते हैं, खुल कर निृशंस हत्या करते हैं,
फिर ,आतंक को आतंक कहने के बजाए
मुद्दे को किसी अन्य विषय की ओर ले जाते हैं;
जब उन्हें कठोर प्रति-उत्तर मिलता है,
तो, वे अचानक मानवता की यादों से भीग जाते हैं,
इतिहास और भूगोल की कथाएँ बताते हैं,
पैनी भंगिमाओं वाली व्यथाएँ जताते हैं,
सारे संसार को मानवता की चादर ओढ़ा देते हैं!
सच तो यह है कि
औरतों और बच्चों की ही नहीं,
यदि हत्या कहीं भी एक व्यक्ति की भी हो,
तो, वह अशर्त्त रूप से अमानवीय है;
पर,पहले अरोक हत्या करना
फिर,मानवता की कहानी पढ़ना,
मुहब्बत के गीत, ग़ज़ल गाना,
रोदन, क्रंदन, आँसुओं की माला पिरोना
क्या मानवता है? मानवता की सच्चाई है?
मन, मानव-जीवन की गहराई है?
या, यह मानवता का सौदा है?
आतंकवाद का परिचित औज़ार है?
आतंक का अनियंत्रित दाव-पेंच,
उसकी अराजक विधा, बहुआयामी शैली, प्रणाली है?
सतीश
Oct 13, 2023
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