सत्कार
सत्कार
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जब-जब किसी सत् को आकार देता हूँ,
जब-जब किसी सत्य के साथ हो लेता हूँ,
जब-जब किसी सही को खुले भाव से
बिना ओट, बिना आग्रह के स्वीकार करता हूँ,
लगता है, सच्चे अर्थों में लेखनी का, मन का,
मानव और मानवता का सत्कार करता हूँ!
-सतीश
April 10, 2023.
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