सूर्य

सूर्य


हे सूर्य देव!

आकाश में रहकर भी 

धरती के कोने-कोने तक पहुँचने की 

तुम्हारी इच्छा-शक्ति नमस्य है


आकाश में एक लघु आकार में आकर भी

तुम पूरे संसार में छा जाते हो


इसलिएतुम आराध्य हो


धरा पर रहकर भी हम उसकी ओर मुड़ नहीं पाते,

ग्रीवा को झुका नहीं पाते,

कुंठा की पैनी जकड़ को ढीली कर नहीं पाते,

अहम्” से “हम” की ओर बढ़ नहीं पाते,

सात्विक रूप से जल नहीं पातेउजल नहीं पाते


  • सतीश 

Nov 21/28 2023

(छठ पूजा के उपरांत)

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