चाँदनी लिंक पाएं Facebook X Pinterest ईमेल दूसरे ऐप - अगस्त 31, 2024 चाँदनी चाँदनी वो सरक गई,न जाने कैसे लहक गई,मन के भीतर कुछ बहक गई,दूर-दूर तक फैल गई,-कोर-कोर में, पोर-पोर में, रग-रेशों में!स्वच्छ ऊर्मियाँ छहर गईं,तबीयत के कोने-कोने में फहर गईं! ⁃ सतीश अगस्त 24, 2024. लिंक पाएं Facebook X Pinterest ईमेल दूसरे ऐप टिप्पणियाँ
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