चाँद का टुकड़ा कैसा होगा?
चाँद का टुकड़ा कैसा होगा?
चाँद का टुकड़ा कैसा होगा?
मन के जैसा-जैसा होगा!
कहीं-कहीं वह कटा-कटा,
कहीं-कहीं वो पूरा होगा!
कहीं-कहीं तपता होगा,
कहीं-कहीं वो शीतल होगा!
चाँद का टुकड़ा कैसा होगा?
मन के जैसा-जैसा होगा!
कहीं-कहीं कठिन-कठोर,
कहीं-कहीं वह कोमल होगा!
कहीं कहीं सहज-सरल,
कहीं-कहीं वो विरल होगा!
चाँद का टुकड़ा कैसा होगा?
मन के जैसा-जैसा होगा!
कहीं-कहीं खिला-खिला,
कहीं-कहीं वह खोया होगा;
कहीं-कहीं योग में डूबा,
कहीं-कहीं वो भोगी होगा!
चाँद का टुकड़ा कैसा होगा?
मन के जैसा-जैसा होगा!
- सतीश
अगस्त 8, 2024.
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