एक इठलाता आलिंगन
एक इठलाता आलिंगन
आँखों से आँखों की प्रेमिल टकराहट,
पुतलियों पर हर्षित लास-विलास,
अधरों पर चौड़ी हँसी की चहल-पहल,
माँसल अनुभूतियों में डूबे लोल कपोल,
भावों के स्पंदनों से कानों के डोलते कुंडल!
एक-दूसरे की पीठों पर उत्साह की सहज थपथपाहट,
तन और मन के मधुर मिलन के संयुक्त झोंकों पर
एक इठलाता आलिंगन!
सतीश
30 जून, 2024.
टिप्पणियाँ
एक टिप्पणी भेजें