दीप-दीप की ज्योति में
दीप-दीप की ज्योति में
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हे ईश्वर, तेरे चरणों पर
एक प्रार्थना अर्पित है कि
दीप-दीप की ज्योति में हम सब
हर पल अन्तर्ज्योति की यात्रा करें,
मन की आँखें खोल-खोल कर
अन्तर्मन का विस्तार करें;
“अहम्” को “हम” की ओर ले जाकर
जीवन में समग्र जीवन का संधान करें;
सभ्यता-संस्कृति की उज्ज्वल राममय राहों पर
मानव बनने की क्रिया-प्रक्रिया को,
उसके मान-मानकों को
हर दिन जल-उजल कर,
पूरी समर्थता से लहक-लहक कर
सह्रदय नव प्रयास दें!
⁃ सतीश
दीपावली, 2024.
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