वो अकेला चाँद

वो अकेला चाँद 


जो अँधेरों से लड़ते हैं,

वे अक्सर अकेले ही होते हैं - 

धरती से आकाश तक,

मन की गहन घाटियों से 

वितान के ऊँचे माथे तक, 

सिकुड़ी हुई विस्मय-भरी कंदराओं से 

आकाशगंगा के फैले, पहेली से दामन तक ! 


-सतीश 

16 अक्टूबर, 2024. 

सिंगापुर 


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