संभावना
संभावना
सुबह-सुबह
काले-काले बादलों से आसमान ढँका था,
पहली वर्षा की प्रसन्न बूँदों से धरती भीग रही थी;
बिना बहुत सोचे-समझे
हल्की फुहारों के बीच बाहर टहलने गया;
कुछ देर बाद अचानक बादलों की ओट से
सूरज एक नन्हें शिशु सा झाँकने लगा,
हल्की-हल्की धूप हौले-हौले उघड़ते मर्म सी छिटकने लगी।
यों, अनजाने तरीक़े से जीवन में
एक “संभावना” प्रत्यक्ष हो जाती है,
संभावना की एक यात्रा स्वयं को गढ़ लेती है!
-सतीश
20 जून, 2024.
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