कविता से चिढ़ हो जाती है!
कविता से चिढ़ हो जाती है!
कभी -कभी कविता से, अपनी ही कविता से चिढ़ हो जाती है।
कविता बड़ी हो जाती है,
हमारा जीवन छोटा हो जाता है,
छोटा ही रह जाता है;
पर, ऐसा ही क्यों?
हम इतने अभिशप्त क्यों हैं?
हम इतने कर्मविहीन क्यों हैं?
हम इतने निम्न, इतने ओछे, असमर्थ क्यों हैं?
#दिल्ली_रेलवे_स्टेशन #delhirailwaystation
#DelhiStampede !
⁃ सतीश
फ़रवरी 16, 2025
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