ये फूल ! -
ये फूल ! -
कोमल टहनियों पर भी टिक जाते हैं,
हल्की पत्तियों के संग भी हो लेते हैं,
मुलायम लतिकाओं पर चढ़कर लहराने लगते हैं,
अस्थिर हवा में भी मुस्काते होते हैं!
बिना किसी चिंता के, बिना चिंतन-मनन् के,
बिना उलझन के, बिना उलाहना के!
न जाने कैसे?
कैसे-कैसे?
⁃ सतीश
मार्च 2, 2025.
टिप्पणियाँ
एक टिप्पणी भेजें