सौंदर्य है!

सौंदर्य है! 


सौंदर्य है, शृंगार के भावों की 

पत्तियों, फूलों-कलियों, भौरों को,

पुतलियों, पुचकारों, पहेलियों को, 

दुलारों, मनुहारों, अभिसारों, गुंजारों को

विराट, उदात्त फलक दे देना! 



सौंदर्य है, जीवन-चेतना के स्पंदनों को थाम कर

आत्मा के स्वरों को पढ़ लेना, पढ़ते रहना, 

अनंत में,  अनंत के मनोभावों में अवगाहन करना, 

नये-नये क्षितिज को गढ़ते रहना, मढ़ते रहना! 


सौंदर्य है, असहमति के प्रति सकारात्मक होना,

अपनी क्रूरतम आलोचनाओं को 

सह्रदय सुनने की मानसिकता रखना! 


सौंदर्य है, जीवन की उलझनों को

निर्विकार भाव से निरंतर सुलझाते रहना! 

सौंदर्य है, स्वयं के विष को

उदारता से सतत् पीते रहना! 


सौंदर्य है, जीवन को अहंकारों की घूर्णियों के बीच 

“अहम्” की ओट से निकाल कर

“हम” के तुंग शीर्ष पर रख देना! 


सौंदर्य है, महत्वाकांक्षाओं को 

शालीनता का महत्व दे देना;

घोर प्रतिद्वंद्विता के बीच भी

मर्यादा के मानकों को ऊँचा बनाये रखना !


सौंदर्य है, ग्लानि और गर्व से परे,

असंकीर्ण सीमाओं के पार देश के चरणों पर 

कोमल-कठिन कर्तव्यों के श्रेष्ठ पुष्प अर्पित कर देना! 


-सतीश

अप्रैल 26/29/30, 2025







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