रोटी सेंकना

रोटी सेंकना 


रोटी को कभी इधर उलट दो,

कभी उधर पलट दो,

लोग कहतें हैं -

रोटी सेंकना अद्भुत कला है! 

एक पुरातन, पवित्र कला है! 

बार-बार सुनता आया हूँ कि

गोल-गोल रोटी बनाना 

एक नैसर्गिक प्रतिभा है! 


परम्परा है, नियति है कि 

जलती रोटी है, 

जलने से वह मुलायम हो जाती है,

फिर उससे गहरी भूख मिटती है किसी की! 


लोगों को भूख हर दिन लगती है,

हर दिन रोटी सेंकी जाती है,

रोटी का प्रारब्ध, भूखों का सौभाग्य 

सब एकताबद्ध हैं, नियति-संबद्ध हैं!


रोटी जानती है कि 

सेंका जाना उसका धर्म है,

उसकी जाति है,

उसकी नियति है,

परम प्रतीति है,

चरम अनुभूति है,

एकमात्र प्रकृति है!


अहो भाग्य! 


बस प्रार्थना करता हूँ कि 

मैं रोटी बनाना सीख लेता,

सेंकना सीख लेता! 

भारत की जनता भी यह कहती होगी, 

काश, वह अपनी प्रधान सेविका हो जाती ! 


सतीश 

अप्रैल 30, 2025 











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