एक-दूसरे की ओर!

एक-दूसरे की ओर! 


अलग-अलग दिशाओं में

जगह-जगह अस्थि-पंजर से बिछे 

बादलों को पढ़ लूँ,

आँधियों की तबीयत को परख लूँ,

हवा की सनसनाहट को छू लूँ! 


तब, हो सकता है, यों ही कहीं

मन को थामने के अनमने-अटपटे, खोये-उलझे

सूत्र मिल जायें,

हम एक-दूसरे की ओर मुड़ जायें! 


#जीवन ! 



टिप्पणियाँ

इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

आतंकवाद की शैली

बहुत बार

तुम, भोर के विन्यास सी!