कैसे लिखूँ ? क्या लिखूँ?

कैसे लिखूँ ? क्या लिखूँ? 


कैसे लिखूँ?

कलम से? या ह्रदय से? 

या मन की अनछुई गहराई से? 

या परिकल्पनाओं के परों से,

उनकी आँखों से, उनके अधरों से? 

उनकी पुतलियों की परछाइयों से, 

उनकी बाँहों के हँसते हुए फैलाव से? 

स्पर्शों के स्पंदनों से, या स्पंदनों के स्पर्शों से?

या एक-दूसरे को सुलगाती उनकी घुली-मिली बेचैनी से?

उनकी किलकारियों से, उनके कूजन से? 


या माटी की महक से,

उसकी जलन और तड़प से? 

या वेदना और संवेदना के घनीभूत लेप से? 

ग़रीबों की अपराजेय ग़रीबी से,

या अमीरी के चिर-परिचित अहंकार से? 

महान् नेताओं की चिंताग्रस्त, निष्णात नारेबाज़ी से? 

उनके अंतहीन आलाप-विलाप से? 

व्यवस्था की सुव्यवस्थित बदहाली से? 

जनता की उपेक्षा की उनकी सुपरिचित कला से? 

विद्वानों, विचारकों की संजीवनी 

कही जाने वाली शाश्वत थोथेबाजी से,

या रचनाकारों, कलाकारों की पुरातन कलाबाज़ी से? 

तौल-तराज़ू पर चढ़ जाने के लिए हमेशा तैयार

उनकी व्यग्र  प्रतिबद्धता से? 

आतंक की कुत्सित ज्वाला से,

या उसके विरुद्ध खड़ी संघर्ष-शक्ति से? 

“वाद” के ग्रास से? 

या निर्विकार चेतना के उजास से? 

कर्तव्य की साँस से? 

किसी अमर्त्य आस से? 

पूरे-अधूरे जीवन से? 

उसकी नैसर्गिक उत्सुकता, अरोक उत्साह से? 


कैसे लिखूँ? क्या लिखूँ? 

क्या-क्या लिखूँ? 


सतीश 

मई 14/जून 9/जून 20/ जून 24, 2025. 



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