हर आग को नमन मेरा !

हर आग को नमन मेरा ! 


मैं

सौंदर्य की आग में गलता रहा, 

वेदना की आग में जलता रहा, 

करुणा की आग में बहता रहा, 

संघर्ष की आग में सुलगता रहा, 

कचोट की आग में तनता रहा, 

हार की आग में  तपता रहा, 

तप की आग में लहकता रहा, 

कर्तव्य की आग में धधकता रहा! 


हर आग को नमन मेरा ! 


सतीश 

मई 5, 2025 

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