डॉनर झील
डॉनर झील
हल्की, पतली, छरहरी धूप!
धरा को निहारता आसमान नीला-नीला होता गया,
बादलों के छोटे-छोटे टुकड़े एक-दूसरे पर लेट गये,
कहीं-कहीं अलग-अलग सरकते रहे;
स्वच्छ, पारदर्शी, नीले जल वाले झील में
अनवरत झिलमिल करती भाव-तरंगें;
छोटे क़द के पहाड़ की हल्की-हल्की ढलान -
जैसे पर्वत-मन धीरे-धीरे झुक कर
धरती को छू लेना चाहता हो!
हवा भोले भावों से भरी पर्वत-छाती से बार-बार टकराती,
फिर, लहराती, फहरती, मचलती हुई
दूर-दूर तक घाटी के शरीर पर छा गई,
उसके ह्रदय में उठतीं उष्ण हिलोरें
कुछ नरम हो गईं, आश्वस्त होकर कुछ ठंडी हो गईं!
झील की बाँहों की परिधि पर बसे
छोटे-बड़े चीड़ की पतली-पतली डालियों पर
जड़े हुए नुकीले पत्ते प्रसन्न स्पंदनों से भर गये!
सतीश
जून 1, 2025
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