हे मृत्यु-देवता !
हे मृत्यु-देवता !
हे मृत्यु-देवता!
मानता हूँ कि
तुम सर्वशक्तिमान हो,
तुम्हारी शक्ति अपरिमित है।
पर, बहुत बार
तुम्हारी लीला अटपटी सी क्यों लगती है?
तुम अति क्रूर क्यों हो जाते हो?
अपनी इच्छाओं को पूरा करने में
अतिरेक तक पहुँचते से लगते हो;
क्या वह तुम्हारी अपनी मर्यादा का भंजन नहीं है?
मुझमें न तो बड़ा ज्ञान है,
न महिमामय कर्म-धर्म,
न सम्पूर्ण भक्ति,
इसलिए क्षमा चाहता हूँ ;
पर, ये प्रश्न तो मन में कौंध जाते हैं;
कौंधते रहते हैं!
-सतीश
जून 13, 2025
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