समय, कुछ असमय सा ?

समय, कुछ असमय सा ? 


इतिहास हो या भूगोल, 

अति गहरी होती हैं, समय की यादें! 

पर, फिर, 

समय इतना असमय सा क्यों हो जाता है? 

वो ठहरना भूल जाता है,

क्षणों में पैठ कर उसको निहारना भूल जाता है, 

वह रूक कर कुछ बोधना भूल जाता है! 

क्यों करता है, समय ऐसा? 

लगातार गति से उसे अपने आप पर चिढ़ नहीं आती? 

स्वयं से कुछ नाराज़गी नहीं होती कि वह भी 

कभी कुछ स्थिर मन का हो जाता, स्थितप्रज्ञ सा होता ! 

वो बहना भूलकर कुछ थम जाता, 

कभी कुछ धीमा हो जाता, अपने आप को पढ़ लेता! 


सतीश 

अगस्त 11/13/15, 2025


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