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होली

होलिकादहन की तीक्ष्ण ज्वाला में  जग की कलुष-क्लेश-शक्ति जली, चारों ओर सुदीप्ति फैली; सात्विक आभा को समेट-समेट कर चाँद ने विशद आकार लिया। पूर्ण चाँद को देख-देख कर फागुन ने बाँहें खोली, पूरी प्रकृति ने समवेत कहा - ‘चलो, साथ मैं भी हो ली’ तो, आयी रंग-उमंग-पुचकारों से भींगी-भींगी, गाती-ठुमकती, ठहठहाती, ठिठोली करती भोली-भाली होली!            -सतीश             27 March, 2021             रंगभरी होली 

वसंत

     वसंत     - - - -  माघ के शुक्ल-पक्ष की पंचमी को होती है माँ सरस्वती की पूजा!  माँ, तुम्हारे आशीष के राग से फूलों के पराग मचलने लगते हैं, तुम्हारी विद्या-वादन-चेतना से पत्तों के हरे-भरे रंग-वेश-मन-तेज दूर-दूर तक पसरने, बहने, विहरने लगते हैं। सुंदर संभावनाओं के सुर सुन-सुन कर आत्म-विश्वास से भर-भर कर कोंपल नये संसार में  आने को आकुल हो जाते हैं। माँ, तुम्हारी वंदना के स्वर से गगन शुभ्र, शुभ्रतर होने में मग्न हो जाता है, धरती नयी बिसात से फूलने-फलने लगती है, वन-उपवन आमोद-विभोर हो जाते हैं, आम-वृक्ष मंजरी पाकर धन्य हो जाते हैं, टेसू मन से खिलने-मुस्काने लगता है, सरसों के फूल सौंदर्य-बोध से पीले-पीले हो जाते हैं। माँ, तुम्हारी आराधना की विवेक-शक्ति, श्रद्धा-निष्ठा से मौसम का धर्म विस्तृत हो जाता है; तुम्हारे कला-गुण को  पाकर, पढ़ कर , गुन कर प्रकृति प्रसन्न, संपन्न, संत,  मोहक वसंत हो जाती है!             - सतीश               27 Feb, 2021

वह आग

आग जो कभी सुलगी थी,  वो आज भी जलती है, कभी मद्धिम,कभी तीक्ष्ण तेवर में, वो आज भी धधकती है। वह लहक, उस लौ की वह लचक, मन में अब भी बहकती है, समय-दूरियों को पाटती,  ठहरती-डोलती,  वह गुदगुदाती-गुनगुनाती है, आग-राग बनकर,  उष्ण नाद बनकर, आदि-अनादि, अमित, अमिय संवाद बनकर।         -सतीश          9 Jan, 2021

कोशिशें

जीवन में  सकारात्मक तत्व  हमेशा उपस्थित होते हैं; हमारी मनोवृत्ति  हो कि हर परिस्थिति में हमारी कोशिशें  इन्हें परख-पहचान ले, पढ़-पकड़ ले! बाधाओं की रोक-टोक गति के उत्साह को उकसाती है, विपरीत परिस्थितियाँ  उछाल-उमंगों को तान देती हैं, विपदाओं के पदों में अनागत शुभ की बोलियाँ बसी होती हैं, जंजीरों की जकड़ में  मुक्ति-छंदों की खनखनाहट भरी होती है, चुनौतियों के शरीर में संभावनाओं के तार-तार बँधे होते हैं। तम से खेल-खेल कर सुबह लाल-लाल हो जाती है। श्रम-तप के बल से जीवन की किरणें धवल हो जाती हैं!  अथक प्रयास के रक्त-रेशे से सफलताओं के वितान बनते हैं, इच्छा-शक्ति की माँसपेशियों में समृद्धियों की ऊर्जा बँधी रहती है, आत्मविश्वास की बुनावट में जीत के विन्यास गढ़े होते हैं। स्वप्न के छोटे-छोटे पंखों में बड़ी-बड़ी उड़ानों के उन्माद भरे होते हैं, नन्हे-नन्हे निर्णयों में जीवन के वृहत आयाम ठहरे होते हैं, साहस की पतली-पतली लकीरों में उद्यम-उद्योग की विशद तस्वीरें बैठी होती हैं, अनजाने-अनमने कदमों में भी  व्यापक संदर्भ रखे होते हैं, फिसलनों-भटकनों में भी उपलब्धि...