वसंत - - - - माघ के शुक्ल-पक्ष की पंचमी को होती है माँ सरस्वती की पूजा! माँ, तुम्हारे आशीष के राग से फूलों के पराग मचलने लगते हैं, तुम्हारी विद्या-वादन-चेतना से पत्तों के हरे-भरे रंग-वेश-मन-तेज दूर-दूर तक पसरने, बहने, विहरने लगते हैं। सुंदर संभावनाओं के सुर सुन-सुन कर आत्म-विश्वास से भर-भर कर कोंपल नये संसार में आने को आकुल हो जाते हैं। माँ, तुम्हारी वंदना के स्वर से गगन शुभ्र, शुभ्रतर होने में मग्न हो जाता है, धरती नयी बिसात से फूलने-फलने लगती है, वन-उपवन आमोद-विभोर हो जाते हैं, आम-वृक्ष मंजरी पाकर धन्य हो जाते हैं, टेसू मन से खिलने-मुस्काने लगता है, सरसों के फूल सौंदर्य-बोध से पीले-पीले हो जाते हैं। माँ, तुम्हारी आराधना की विवेक-शक्ति, श्रद्धा-निष्ठा से मौसम का धर्म विस्तृत हो जाता है; तुम्हारे कला-गुण को पाकर, पढ़ कर , गुन कर प्रकृति प्रसन्न, संपन्न, संत, मोहक वसंत हो जाती है! - सतीश 27 Feb, 2021