ग़ुलामी, चाहे-अनचाहे!
ग़ुलामी के गुल बड़े मोहक होते हैं,
हम में से कुछ उनके “सुवास” में
बँधे होते हैं, बँधे रहना चाहते हैं,-
आमूल, अनवरत, आजीवन!
ग़ुलामी के वृक्ष बड़े ऊँचे होते हैं,
विविध प्रकार, आकार, विस्तार के,
बड़ी- बड़ी छाया वाले, बड़े-बड़े फल वाले,
विशद जड़ वाले, गहरी जड़ता वाले;
वे धरती को पकड़े रहना जानते हैं,
आसमान की ओर उचकना भी जानते हैं;
उनकी भंगिमाएँ, उनकी छवियाँ,
शिक्षा-परीक्षा-मनोभावनाएँ,
अद्भुत कामनाएँ, ‘मनोहारी’ कुंठाएँ
दूर-दूर तक हमें जकड़ती हैं-
चाहे-अनचाहे, समय-असमय!
-सतीश
Oct 26, 2021.
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