दिनकरजी
सिमरिया की माटी से,
या वहाँ रहती-बहती,
उसे पालती, बहलाती, सहलाती
माँ गंगा के तप-जल से?
“रवि” की प्रखर किरणों से,
या सबों की मिली-जुली आशीष-आभा से?
स्वच्छ चिंतन से, निगूढ़ सूक्ष्मता से,
विराट् विचारों, तीक्ष्ण तर्कों से?
छोटे-बड़े पैने बिम्बों से,
युग-संघर्ष की पीड़ा से?
समय-वक्ष के शील-साहस से?
पता नहीं, ऐ सरस्वती-पुत्र,
तेरी भाषा में धार कहाँ से आती है?
(रवि सिंह उनके पिताजी का शुभ नाम है)
- सतीश
24 April, 2021.
दिनकरजी की पुण्यतिथि पर।
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