बड़े-बड़े पेड़

ऊँचे पर्वत से घिरी घाटी से

गुजरते हुए दिखा कि

बड़े-बड़े, लम्बे-लम्बे पेड़ उनकी देह पर तने थे। 

लगा कि इन्हें देखकर 

विज्ञान कहता : 

ये सूर्य की रौशनी की खोज में ऊपर जा रहे हैं !

 

फिर, मन के भीतर कहीं से आवाज़ आयी-

कि इन्हें देखकर धर्म कहता -

यदि इन पेड़ों ने

अपने अंतस्तल में उज्ज्वलता-उष्णता का

एक लघु खंड भी बसा लिया होता, 

तो, संभवत:, उन्हें 

ऊँचे से ऊँचे की होड़ में,

बेचैन आपाधापी में शामिल नहीं होना पड़ता! 


प्रकृति-कृति-संस्कृति कहती है 

कि हम अपने मन के भीतर 

विज्ञान और धर्म की यह बातचीत 

 होने दें, होते रहने दें! 


-सतीश 

Oct 22, 2021. 




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