पर्ल हार्बर
संघर्षों, बलिदानों की पुण्य भूमि!
स्वतंत्रता के रक्षकों की तीर्थ-स्थली!
बलिदानों के कर्म-आसक्त रक्त से
सोये-जगे ज्वालामुखी के मुँह, मन, तेवर,
पर्वतों पर लेटे-सुस्ताते पत्थर,
मिट्टी के कण-कण
अब भी लाल-लाल हैं!
यहाँ
नन्हीं-नन्हीं, सरल-तरल धूप
मन पर अविरल छा जाती है,
हल्की-हल्की हवाओं की अरोक थापें
दूर गत-विगत भावों को उकसाती हैं।
बादल विह्वल होकर
घाटियों पर छा जाते हैं,
पर्वतों से गलबाहियाँ करते रहते हैं;
आसमान की छाती नम हो जाती है,
वर्षा की हल्की-भारी बूँदें
आकुल होकर समय-असमय पर
पूरी प्रकृति को भिंगो देती हैं।
सूरज की तप्त, उज्ज्वल किरणें
अपने स्मृति-यात्रा-पथ में
प्रकृति के आँसुओं से टकराकर
वीरों, वीरगतियों-बलिदानों को याद कर,
उनके बिम्ब-प्रतिबिम्बों को सँजो-सँवार कर
मनोहारी, प्रसन्न इन्द्रधुनष रचती रहती हैं।
-सतीश
24th Dec, 2021.
Pearl Harbor, Hawaii.
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